प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बैसाखी पर्व को खालसा जन्म दिवस के रूप में मनाया गया

(रितिक कुमार)

हरिद्वार प्रेमनगर चौक स्थित निर्मल विरक्त कुटिया डेरा कार सेवा ऐतिहासिक गुरुद्वारे में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बैसाखी पर्व को खालसा जन्म दिवस के रूप में मनाया गया। अखंड पाठ के भोग उपरांत रागी जत्थों ज्ञानी प्रीतम सिंह, ज्ञानी मालक सिंह, ज्ञानी शमशेर सिंह, ज्ञानी हरबीर सिंह द्वारा शब्द कीर्तन और कथावाचकों द्वारा कथा सुनाकर संगत को निहाल किया गया। इस अवसर पर बाबा सुखा सिंह कार सेवा दिल्ली वाले, बाबा सुलतान लाड़ी ने बैसाखी और खालसा जन्म दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ स्थापित किया। खालसा जुल्म के खिलाफ लड़ने की शक्ति है। उस समय अत्याचार, अन्याय बहुत बढ़ गया था जिसे रोकने के लिए गुरु महाराज को आगे आना पड़ा और खालसा की स्थापना हुई। बाबा पंडत ने कहा कि सिक्ख समाज आज भी गुरुद्वारा ज्ञान गोदडी के लिए लड़ाई लड़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों से धरने प्रदर्शन किए जा रहे हैं लेकिन सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल को दिनारपुर से हरकी पैड़ी तक पैदल कूच किया जाएगा। जिसकी सूचना अधिकारियों को भी है। हरकी पैड़ी के पास गुरुद्वारे के मूल स्थान पर अरदास की जाएगी जिसमें सैकड़ों की संगत शामिल रहेगी। इस दौरान रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया जिसमें संगत ने स्वैच्छिक रक्तदान किया।इस अवसर पर सूबा सिंह ढिल्लों, हरजीत सिंह, सिमरनजीत सिंह, लाहौरी सिंह, अनूप सिंह सिद्धू, उज्जल सिंह सेठी, सुखदेव सिंह, सतपाल सिंह चौहान, रमनदीप सिंह, संजय चौधरी, राजेंद्र सिंह, हरमन सिंह, निर्मल कौर, सिमरन, लखविंदर सिंह, जसविंदर कौर, नैनी महेंद्रू, बीना चितकारिया, सुमन शर्मा, अमनदीप कौर आदि उपस्थित रहे।

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