हरिद्वार। श्यामपुर गाजीवली स्थित मोहन गोकुल धाम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन पूज्य पाद कृष्णा संजय जी महाराज, पीठाधीश्वर मोहन गोकुल धाम, हरिद्वार के पावन सान्निध्य में हुआ। इस दौरान मंदिर परिसर भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।

जन्माष्टमी के अवसर पर ठाकुर जी का विधि-विधानपूर्वक पंचामृत अभिषेक एवं स्नान कराया गया। इसके बाद भजन-कीर्तन, सत्संग और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा का आयोजन हुआ। महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं को चरणामृत प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर पूज्य पाद कृष्णा संजय जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर विवेक, बुद्धि और धर्म के जागरण का संदेश है। जब जीवन में अधर्म, अज्ञान और अहंकार का अंधकार बढ़ता है, तब कृष्ण का संदेश मनुष्य को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी तभी सार्थक है, जब मनुष्य के भीतर विवेक का उदय हो और उसकी बुद्धि सही-गलत का निर्णय करने लगे। भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से मानवता को कर्म, कर्तव्य, समत्व और आत्मज्ञान का अमर संदेश दिया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को अपने धर्म और कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए।
महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को केवल मंदिरों में खोजने के बजाय उन्हें अपने हृदय में स्थान देना आवश्यक है। जहां प्रेम है, वहां कृष्ण हैं; जहां सत्य है, वहां कृष्ण हैं और जहां निष्काम कर्म एवं धर्म है, वहीं कृष्ण का वास है।

सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ पूरे वातावरण को कृष्णमय कर दिया। पंचामृत अभिषेक, कथा, भजन-कीर्तन, महाआरती और चरणामृत प्रसाद वितरण ने जन्माष्टमी महोत्सव को आध्यात्मिक रूप से विशेष बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में पूज्य पाद कृष्णा संजय जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की मंगलकामनाएं दीं। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान श्रीकृष्ण सभी के जीवन में प्रेम, शांति, सद्बुद्धि, विवेक और धर्म का प्रकाश भरें तथा प्रत्येक परिवार में सुख-समृद्धि और सनातन संस्कारों की ज्योति सदैव प्रज्वलित रखें।

