हरिद्वार। भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज का 73वां अवतरण दिवस बुधवार को रानीपुर झाल स्थित उत्तराखंड संस्कृत अकादमी में संत-महापुरुषों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में सभी तेरह अखाड़ों के संत-महापुरुषों ने शिरकत कर स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज को अवतरण दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान संतों एवं श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया। 73 किलो के लड्डू का भोग लगाकर प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज त्याग, तपस्या और सेवा की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान से समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज धर्म एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सेवा कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज की अपने गुरु के प्रति श्रद्धा और विश्वास युवा संतों के लिए प्रेरणादायी है।
समारोह में आभार व्यक्त करते हुए स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने में संत-महापुरुषों की महत्वपूर्ण भूमिका है। युवा संत राष्ट्र की धरोहर हैं और उन्हें गुरुजनों के सानिध्य में प्राप्त ज्ञान के माध्यम से समाज को आलोकित करने का कार्य करना चाहिए।
पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि संत-महापुरुष समाज के प्रेरणास्रोत हैं। सभी को स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज के त्यागमयी जीवन से प्रेरणा लेकर मानव सेवा में योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए।
इस अवसर पर भूमा निकेतन के प्रबंधक राजेंद्र शर्मा एवं ट्रस्टियों ने संत-महापुरुषों और अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में प्रसार भारती के चेयरमैन नवनीत सहगल, महानिर्वाण अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी, महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महाराज, अनिरुद्ध भाटी सहित बड़ी संख्या में संत-महापुरुष एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।

