(रितिक कुमार)
हरिद्वार। सुखदेव आश्रम में राधे-राधे भागवत समिति, जयपुर राजस्थान के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एवं नंदोत्सव का भव्य और भक्तिमय आयोजन हुआ। कथा के दौरान आश्रम परिसर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा।
व्यास पीठ पर आसीन परम श्रद्धेय मदन मोहन जी महाराज ने भगवान श्रीराम अवतार, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एवं नंदोत्सव के मनोहारी प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं।
कथा व्यास ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग की महिमा बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार अत्याचार और अधर्म के विनाश के साथ-साथ धर्म, सत्य और सदाचार की पुनर्स्थापना का संदेश देता है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आते ही आश्रम परिसर ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी मनाई। नंदोत्सव के दौरान भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।
मदन मोहन जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला आध्यात्मिक माध्यम है। कथा श्रवण से मनुष्य के भीतर भगवान के प्रति श्रद्धा, सेवा और समर्पण की भावना जागृत होती है।
कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का आनंद लिया। पूरा आश्रम परिसर जयघोष, भजन-कीर्तन और भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।

