यूपी में बनेगा किसान-केंद्रित कार्बन क्रेडिट इकोसिस्टम, IIT रुड़की ने किए दो बड़े MoU

(रितिक कुमार)

रुड़की,। जलवायु-स्मार्ट कृषि और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी को मजबूत किया है। आईआईटी रुड़की ने कृषि निदेशालय, उत्तर प्रदेश सरकार तथा उद्योग साझेदारों Compliance Kart Pvt. Ltd. और Trayambhu Tech Solutions Pvt. Ltd. के साथ कार्यक्रम “Carbon Credits Initiation and Its Benefits for Sustainable Agriculture in Uttar Pradesh” के तहत दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह पहल पब्लिक-प्राइवेट-एकेडमिक पार्टनरशिप के रूप में विकसित की गई है, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में पारदर्शी, विश्वसनीय और किसान-केंद्रित कार्बन क्रेडिट इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके तहत सरकार की नीतियों, आईआईटी रुड़की की वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञता और उद्योग की क्षमताओं को एक साझा मंच पर लाया जाएगा।

किसानों को कार्बन बाजार से जोड़ने की तैयारी

इस पहल के माध्यम से जलवायु-स्मार्ट और पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने के साथ-साथ मृदा जैविक कार्बन बढ़ाने, जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता में सुधार और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा कृषि वानिकी और जैव विविधता को बढ़ावा देते हुए किसानों के लिए कार्बन वित्त और उभरते कार्बन बाजारों में भागीदारी के नए अवसर तैयार किए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार के निदेशक कृषि एवं संबद्ध सेवाएं टी.एम. त्रिपाठी ने कहा कि यह साझेदारी सतत कृषि पद्धतियों को उभरते कार्बन बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग की संयुक्त भागीदारी से किसानों के लिए नए अवसर पैदा होने के साथ जलवायु लचीलापन और सतत संसाधन प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।

तकनीक से होगी कार्बन क्रेडिट की निगरानी

इस फ्रेमवर्क के तहत आईआईटी रुड़की Technical and Scientific Nodal Agency के रूप में कार्य करेगा। संस्थान वैज्ञानिक कार्यप्रणालियों, Project Design Documents की समीक्षा, निगरानी प्रणालियों, Digital Monitoring, Reporting and Verification (D-MRV), वैज्ञानिक मूल्यांकन, गुणवत्ता समीक्षा, क्षमता निर्माण, अनुसंधान और तकनीकी समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में सैटेलाइट इंटीग्रेशन, GIS मैपिंग, GPS आधारित फील्ड सिस्टम, मोबाइल एप्लीकेशन, IoT, डिजिटल ऑडिट ट्रेल और ट्रांसपेरेंसी डैशबोर्ड जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की योजना है। इससे कार्बन क्रेडिट परियोजनाओं की निगरानी, ट्रेसेबिलिटी और पारदर्शिता को मजबूत किया जा सकेगा।

शुरुआती चरण में तीन जिलों पर फोकस

कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिलों को शामिल किया जाएगा। इसके अंतर्गत पांच लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि क्षेत्र को कवर करने की योजना है। आवश्यक अनुमोदन और प्रदर्शन मूल्यांकन के बाद इस मॉडल को उत्तर प्रदेश के अन्य कृषि-जलवायु क्षेत्रों तक विस्तारित किया जा सकता है।

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि संस्थान वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी नवाचार को ऐसे समाधानों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनसे सामाजिक और पर्यावरणीय स्तर पर सार्थक प्रभाव पैदा हो। उन्होंने कहा कि सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग की साझेदारी से विकसित यह कार्बन क्रेडिट इकोसिस्टम सतत कृषि, जलवायु लचीलापन और किसानों के लिए नए आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है।

पांच साल के फ्रेमवर्क में होगा चरणबद्ध क्रियान्वयन

दोनों MoU प्रारंभिक पांच वर्ष के फ्रेमवर्क का आधार तैयार करते हैं। इसके तहत समन्वय तंत्र, बेसलाइन प्लानिंग, परियोजना-विशिष्ट समझौते, D-MRV प्रणाली की तैनाती और किसानों के ऑनबोर्डिंग के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से कार्यक्रम को लागू किया जाएगा।

यह पहल भारत की विकसित हो रही Carbon Credit Trading Scheme (CCTS) के अनुरूप है और Verra VCS, Gold Standard सहित लागू राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार मानकों को ध्यान में रखती है।

आईआईटी रुड़की की टीम की ओर से इस पहल में प्रो. विवेक कुमार मलिक, डीन, SRIC द्वारा संस्थागत एवं रणनीतिक पर्यवेक्षण तथा डॉ. ए.एस. मौर्य, नोडल अधिकारी/अधिकृत हस्ताक्षरी द्वारा तकनीकी एवं वैज्ञानिक समन्वय किया जा रहा है।

इस साझेदारी से वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल तकनीक, सतत कृषि और कार्बन वित्त को एक साथ जोड़कर किसानों को वैश्विक कार्बन अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

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