(रितिक कुमार)
हरिद्वार के पावन भूपतवाला क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध तुरियानन्द ट्रस्ट के तत्वाधान में ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 गुरु भगवान स्वामी तुरियानन्द जी महाराज का 55वाँ निर्वाण दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य रूप में मनाया गया। आयोजन एक विराट संत समागम के रूप में सम्पन्न हुआ, जिसमें देशभर से पधारे संत-महापुरुषों, महामंडलेश्वरों, महंतों एवं श्रद्धालु भक्तों की गरिमामय उपस्थिति ने आश्रम परिसर को दिव्यता से आलोकित कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चारण, गुरु पूजन एवं हवन-यज्ञ के साथ हुआ। इसके उपरांत संतों के श्रीमुख से निकली ज्ञान, वैराग्य और भक्ति से ओत-प्रोत अमृतमयी वाणी ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की। आयोजन स्वामी श्री श्री 1008 विवेकानंद गिरी महाराज के सान्निध्य एवं संरक्षण में सम्पन्न हुआ, जहां ट्रस्ट द्वारा सभी संतों का विधिवत सम्मान एवं अभिनंदन किया गया।
संतों ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, सेवा, संयम और भक्ति को जीवन का मूल आधार बताते हुए समाज को सद्मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुरु की शरण ही जीवन के वास्तविक कल्याण का मार्ग है। इस अवसर पर “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु…” तथा “गुरु बिन ज्ञान न उपजे…” जैसे प्रेरणादायी श्लोकों एवं दोहों के माध्यम से गुरु महिमा का महत्व भी प्रतिपादित किया गया।
गद्दीनशीन स्वामी विवेकानंद गिरी महाराज ने सभी संतों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन, गुरु वंदना और धार्मिक घोष से वातावरण भक्तिरस में सराबोर रहा।
इस अवसर पर अनंत विभूषित स्वामी विश्वात्मातानंद पुरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद पुरी, महंत ज्ञान देव महाराज, स्वामी केशवानंद गिरी, स्वामी दिनेशानंद गिरि, महंत ज्ञानानंद महाराज, स्वामी सदाशिवानंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी अभिषेक चैतन्य, स्वामी विज्ञानानंद, स्वामी शिवानंद, विजयानंद पुरी महाराज, स्वामी सुदर्शन जी महाराज, स्वामी हरिहरानंद, महंत रवि देव, महंत दिनेश दास, स्वामी सूर्य दास, आचार्य डॉ. प्रेमानंद, स्वामी प्रज्ञानंद पुरी सहित अनेक संत-महापुरुष उपस्थित रहे।
ट्रस्ट के अध्यक्ष ओमप्रकाश अरोड़ा, उपाध्यक्ष महेंद्र पाल ढल्ल, महासचिव अमित वत्स, कोषाध्यक्ष सुभाष चंद्र मल्होत्रा, संयुक्त सचिव सुदर्शन बजाज सहित अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।
यह दिव्य आयोजन आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का अनुपम संगम बनकर श्रद्धालुओं के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।

