परमार्थ गुरुकुल में राष्ट्रभक्ति और संस्कृति के साथ मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस

(रितिक कुमार)

ऋषिकेश, 15 अगस्त। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में 80वां स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ श्रद्धा एवं उल्लासपूर्वक मनाया गया। परमार्थ गुरुकुल में आयोजित कार्यक्रम में तिरंगे के सम्मान में पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम में गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने वैदिक मंत्रोच्चार, राष्ट्रगान, देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की गौरवशाली परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल 15 अगस्त 1947 को प्राप्त हुई राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और ज्ञान परंपरा सदियों से जीवंत रही है।

उन्होंने कहा कि भारत ने कभी केवल भूभाग को राष्ट्र नहीं माना, बल्कि राष्ट्र को एक जीवंत चेतना के रूप में स्वीकार किया है। मातृभूमि, गंगा, हिमालय, ऋषि परंपरा, संस्कृति, संस्कार, शास्त्र, साधना और समाज की समन्वित अनुभूति ही भारत की पहचान है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का इतिहास केवल युद्धों और आंदोलनों का इतिहास नहीं, बल्कि उस अदम्य आत्मबल की कथा है जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी भारत की आत्मा को जीवित रखा।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की गाथा को समझना है तो देश के गुरुकुलों और उसकी ज्ञान परंपरा को समझना होगा। गुरुकुल केवल शिक्षा के केंद्र नहीं थे, बल्कि राष्ट्र निर्माण के ऐसे केंद्र थे, जहां विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ चरित्र, संयम, कर्तव्य, शौर्य, सेवा, सत्य, त्याग और राष्ट्रधर्म की शिक्षा दी जाती थी।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की नींव संतों, आचार्यों, संन्यासियों, शिक्षकों, क्रांतिकारियों, किसानों, श्रमिकों, माताओं और युवाओं के त्याग से मजबूत हुई। भारतीय ग्रंथों और ज्ञान परंपरा ने समाज में कर्म, कर्तव्य, मर्यादा, आत्मज्ञान और लोककल्याण की भावना को मजबूत किया।

स्वामी चिदानन्द ने कहा कि स्वतंत्रता के 80 वर्षों की यात्रा संघर्ष, निर्माण और आत्मविश्वास की यात्रा रही है। देश ने विभाजन की पीड़ा, गरीबी, अशिक्षा, युद्ध, सामाजिक विषमताओं और विकास की अनेक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन भारत लगातार आगे बढ़ता रहा। विज्ञान, अंतरिक्ष, कृषि, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, चिकित्सा, खेल और अन्य क्षेत्रों में देश ने अपनी क्षमता का परिचय दिया है।

उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता के मूल्यों को अपने जीवन में उतारें। व्यक्ति भय, अज्ञान, स्वार्थ और विभाजनकारी विचारों से मुक्त होकर एक भारत, श्रेष्ठ भारत और विश्वकल्याणकारी भारत के निर्माण में योगदान दे।

कार्यक्रम के अंत में परमार्थ निकेतन की ओर से समस्त देशवासियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं और राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं संस्कृति की रक्षा के साथ देश सेवा का संकल्प लिया गया।

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