हरिद्वार। बड़ा उदासीन अखाड़ा कनखल में देवता परिवर्तन तथा अखाड़े के वरिष्ठ एवं प्रबुद्ध संतों की कथित उपेक्षा का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। रविवार को भूपतवाला स्थित शांतिकुंज गेट के सामने गुरुद्वारे में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं मां मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज तथा जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज की उपस्थिति में पंजाब से आए बड़ा उदासीन अखाड़ा के संतों ने अपना पक्ष रखा।
बैठक में संतों ने आरोप लगाया कि अखाड़े पर कुछ चुनिंदा संतों का वर्चस्व बना हुआ है और लंबे समय से वरिष्ठ महंतों एवं प्रबुद्ध संतों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की।
इस अवसर पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि किसी भी संत के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। जिसका जो अधिकार है, उसे अवश्य मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन समाज और धर्म की सेवा के लिए समर्पित होता है, इसलिए आपसी दुर्भावना और विवाद की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
उन्होंने बताया कि पंजाब से आए बड़ा उदासीन अखाड़ा के महंतों, सचिवों एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा उठाए गए प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है। साथ ही इस संबंध में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तथा पंजाब सरकार से भी चर्चा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी संत का उत्पीड़न किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

