हरिद्वार। श्री अवधूत मंडल आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद देव महाराज की परम शिष्या साध्वी नेहा आनंद देव का अवतरण दिवस श्रद्धा एवं सादगी के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में तेरहों अखाड़ों के संत-महापुरुषों और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने उपस्थित होकर साध्वी नेहा आनंद देव को अवतरण दिवस की शुभकामनाएं दीं और उनके दीर्घायु एवं मंगलमय जीवन की कामना की।
अवसर पर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया तथा हनुमान जी को 56 भोग अर्पित किया गया। देर शाम भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु भक्तों ने भजनों पर भाव-विभोर होकर धर्म और अध्यात्म की अनुभूति की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने साध्वी नेहा आनंद देव को अवतरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का दायित्व युवा संतों पर है। साध्वी नेहा आनंद देव जिस प्रकार सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभा रही हैं, वह अत्यंत सुखद और प्रेरणादायी है।
महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद देव महाराज ने कहा कि साध्वी नेहा आनंद देव भक्तों को धर्म एवं अध्यात्म का ज्ञान प्रदान करने के साथ ही सनातन धर्म के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं। उनके सेवा और धर्मकार्य से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
आह्वान पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अरुण गिरी महाराज एवं महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी ने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में संत-महापुरुषों की सदैव अहम भूमिका रही है। साध्वी नेहा आनंद देव अपने गुरु द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए धर्म, संस्कृति के उत्थान और मानव कल्याण के लिए योगदान कर रही हैं।
सभी संत-महापुरुषों का आभार व्यक्त करते हुए साध्वी नेहा आनंद देव ने कहा कि पूज्य गुरुदेव से प्राप्त शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए समाज में सनातन धर्म और अध्यात्म का प्रकाश फैलाना तथा मानव कल्याण करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है।
इस अवसर पर डीपी यादव ने भी साध्वी नेहा आनंद देव को अवतरण दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सरल एवं सहज स्वभाव की संत साध्वी नेहा आनंद देव अपने गुरु के कार्यों को आगे बढ़ाते हुए धर्म और समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान दे रही हैं।
कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती, महंत सूरज दास, महंत सुतीक्ष्ण मुनि, स्वामी दिनेश दास, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी रघुवीर दास, महंत गोविंद दास, संत जगजीत सिंह, स्वामी हरिहरानंद सहित बड़ी संख्या में संत-महंत एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।

