माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, श्री योगी आदित्यनाथ जी और परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी की लखनऊ में हुई दिव्य भेंटवार्ता

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी तथा परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी की दिव्य एवं अत्यंत प्रेरणादायक भेंटवार्ता हुई।राज्य के सर्वांगीण विकास, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा आध्यात्मिक मूल्यों के संवर्धन पर विस्तृत एवं सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।

इस दिव्य भेंट के अवसर पर विशेष रूप से पावन नगरी अयोध्या तथा तीर्थराज प्रयाग के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विकास पर गहन चर्चा हुई। दोनों ही नगर भारतीय सभ्यता, आस्था और सनातन संस्कृति के जीवंत प्रतीक हैं, और इनके समग्र विकास को लेकर एक दूरदर्शी, संतुलित एवं लोककल्याणकारी दृष्टिकोण साझा किया गया। सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण, विकास और विरासत के समन्वय का अनुपम उदाहरण है।माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हो रहे अद्भुत, ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी विकास कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुये पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश केवल आधारभूत संरचना, औद्योगिक विकास एवं सुशासन के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण में भी एक उत्कृष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सौहार्द का वातावरण निरंतर सुदृढ़ हो रहा है, जिससे जनमानस में विश्वास और समृद्धि की भावना प्रबल हो रही है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वास्तविक विकास वही है जो प्रकृति, संस्कृति और अध्यात्म के संतुलन के साथ आगे बढ़े। उन्होंने विशेष रूप से नदियों की पवित्रता, पर्यावरण संरक्षण तथा युवा पीढ़ी में सनातन मूल्यों के संवर्धन पर बल दिया। माननीय मुख्यमंत्री जी और उनकी सरकार का उद्देश्य केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं एवं आध्यात्मिक मूल्यों को भी समान रूप से संरक्षित एवं संवर्धित करना है। उत्तर प्रदेश आज केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का केंद्र बनकर विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।पूज्य स्वामी जी ने कहा कि जब शासन, संत परंपरा और समाज एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तब राष्ट्र वास्तविक अर्थों में उन्नति करता है। उन्होंने जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन तथा नदियों की स्वच्छता जैसे अभियानों को जन आंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया।इस पावन अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी को माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रभु श्रीराम जी की दिव्य प्रतिमा और अंगवस्त्र भेंट किया.

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