लालढांग, हरिद्वार। लालढांग क्षेत्र में रवासन नदी पर पुल निर्माण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। हाल ही में रवासन नदी पार करते समय बह जाने से स्कूल से लौट रहे छात्र आर्यन भट्ट की मौत और इससे पहले एक ग्रामीण के तेज बहाव में बहकर लापता होने की घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है।
बुधवार को हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत समर्थकों और ग्रामीणों के साथ रवासन नदी के किनारे पहुंचीं और पुल निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। विधायक ने शासन-प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय में पुल निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया तो वह नदी किनारे आमरण अनशन शुरू करेंगी।

विधायक ने मांग की कि प्रस्तावित पुल का नाम नदी के तेज बहाव में जान गंवाने वाले छात्र आर्यन भट्ट के नाम पर रखा जाए, ताकि उसकी स्मृति हमेशा बनी रहे।
अनुपमा रावत ने कहा कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लालढांग क्षेत्र से करीब तीन किलोमीटर दूर एक पुल का निर्माण कराया था और क्षेत्र में एक नए पुल को स्वीकृति भी दी थी। इसके बाद सरकार बदल गई और उनके आरोप के अनुसार भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुल निर्माण के लिए आवश्यक बजट जारी नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि रवासन नदी के दोनों ओर मीठी बेरी, रसूलपुर बड़ा, रसूलपुर छोटा, लालढांग समेत दर्जनों गांव बसे हुए हैं। बरसात के दौरान पहाड़ों से आने वाले तेज पानी के कारण नदी पार करना ग्रामीणों के लिए जानलेवा बन जाता है। इसके बावजूद लोग रोजमर्रा की जरूरतों और आवागमन के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं।

विधायक ने बताया कि पुल निर्माण की प्रक्रिया में वन विभाग और जिला प्रशासन की स्वीकृतियां मिल चुकी हैं, लेकिन शासन स्तर से बजट जारी नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से तत्काल बजट जारी कर निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि “लोगों की जान जा रही है, इसके बावजूद सरकार गंभीर नहीं है। यदि 10 दिनों के भीतर झूला पुल निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ तो नदी किनारे ही आमरण अनशन किया जाएगा।”
प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी रवासन नदी के किनारे पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ जाने से आवागमन बेहद खतरनाक हो जाता है।
पुलिस-प्रशासन की ओर से नदी की ओर जाने वाले रास्तों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि लंबा रास्ता तय करने से बचने के लिए वे मजबूरी में नदी पार करते हैं। ऐसे में क्षेत्र में स्थायी पुल का निर्माण ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

