जापान के दो संत बने निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर, वीरभद्र मंदिर में हुआ भव्य पट्टाभिषेक

(रितिक कुमार)

हरिद्वार। वीरभद्र मंदिर में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित पट्टाभिषेक समारोह में जापान के संत महामंडलेश्वर स्वामी बालाकुंभ पुरी महाराज के शिष्य स्वामी महादेवानंद गिरी एवं स्वामी कृष्णानंद गिरी को निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर पद की उपाधि प्रदान की गई।

निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर एवं सभी तेरह अखाड़ों के संत-महापुरुषों ने दोनों संतों को तिलक-चादर प्रदान कर विधिवत महामंडलेश्वर पद पर अभिषिक्त किया। इस दौरान संतों ने पुष्पवर्षा कर नवनियुक्त महामंडलेश्वरों को शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद प्रदान किया।

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि अखाड़ा परंपरा में महामंडलेश्वर का पद केवल सम्मान नहीं, बल्कि सनातन धर्म के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महामंडलेश्वर स्वामी महादेवानंद गिरी एवं महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद गिरी अपने गुरु महामंडलेश्वर स्वामी बालाकुंभ पुरी महाराज के मार्गदर्शन में निरंजनी अखाड़े की परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए जापान में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने भी दोनों नवनियुक्त महामंडलेश्वरों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि अखाड़ा एवं संत परंपरा का पालन करते हुए दोनों संत सनातन के उत्थान में अपना योगदान दें।

पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं ऋषिकेश विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने भी स्वामी महादेवानंद गिरी एवं स्वामी कृष्णानंद गिरी को शुभकामनाएं दीं। वहीं निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी एवं महंत दर्शन भारती ने कहा कि विश्व के विभिन्न देशों में सनातन संस्कृति के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है। दोनों महामंडलेश्वर जापान में सनातन के प्रचार-प्रसार को नई गति देने का कार्य करेंगे।

महामंडलेश्वर स्वामी बालाकुंभ पुरी महाराज ने अपने दोनों शिष्यों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की श्रेष्ठ संस्कृति है। नवनियुक्त महामंडलेश्वर स्वामी महादेवानंद गिरी एवं स्वामी कृष्णानंद गिरी ने सभी संत-महापुरुषों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज के नेतृत्व एवं संत परंपराओं का पालन करते हुए वे निरंजनी अखाड़े की उन्नति में योगदान देंगे तथा जापान में श्रद्धालु भक्तों को सनातन संस्कृति से जोड़ने का कार्य करेंगे।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर साध्वी भगवती पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी, महंत राज गिरी, महंत भूपेंद्र गिरी, साध्वी ओशो माता, महंत गंगा गिरी, स्वामी अनंतानंद, स्वामी रामानुज सरस्वती, स्वामी हरिवल्लभदास शास्त्री, कथाव्यास आनंद स्वामी सहित बड़ी संख्या में संत-महंत मौजूद रहे।

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