हरिद्वार। अखाड़ों में परंपराओं और नियमों के कथित उल्लंघन के मामलों की जांच कर पीड़ित संतों को न्याय दिलाने के लिए अखाड़ा परिषद जल्द ही एक जांच समिति का गठन करेगी। यह घोषणा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी और महामंत्री श्रीमहंत हरी गिरी ने की।
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन की पंजाब शाखा के संतों द्वारा समर्थन दिए जाने के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने कहा कि जिन अखाड़ों में परंपराओं और नियमों की अनदेखी की जा रही है, वहां की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित संतों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि नया उदासीन अखाड़े की पंजाब शाखा के महंतों ने अखाड़े के देवताओं के नकली स्वरूप बनाए जाने जैसी गंभीर शिकायतें भी की हैं, जिसे सनातन परंपरा का अपमान बताते हुए इसकी भी जांच कराई जाएगी। इसके अलावा श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महंत प्रज्ञान मुनि, महंत रमन मुनि तथा श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के पूर्व सचिव महंत बलवंत सिंह द्वारा उठाए गए अनियमितताओं के मुद्दों की भी जांच होगी।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने दावा किया कि उन्हें निरंजनी, जूना, आह्वान, अग्नि, आनंद, निर्मल, निर्मोही, नया उदासीन और बड़ा उदासीन सहित नौ अखाड़ों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि सभी अखाड़े मिलकर सनातन परंपराओं और अखाड़ा व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने के लिए कार्य करेंगे।
अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरी गिरी ने बताया कि नया उदासीन अखाड़े की पंजाब शाखा के पंच परमेश्वरों सहित 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया है। जल्द ही अखाड़ा परिषद की बैठक बुलाकर जांच समिति गठित की जाएगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद कानूनी परामर्श लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान महंत बलवंत सिंह ने श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी और श्रीमहंत हरी गिरी के नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद को वास्तविक परिषद बताते हुए कहा कि आगामी हरिद्वार कुंभ, नासिक महाकुंभ और उज्जैन सिंहस्थ कुंभ का संचालन इसी नेतृत्व में होगा।
पत्रकार वार्ता में श्रीमहंत प्रेम गिरी, महंत महेश पुरी, महंत शिवशंकर गिरी सहित अनेक संत-महंत उपस्थित रहे।

